जीतने पर भी तुम्हें खुशी ना मिली🥲
(1)
जीतने पर भी तुम्हें खुशी ना मिली,
ऐसा लगता है----- तुम हो हारे हुए।
हराया है, उससे मिला पाते हो ना नज़र।
तेरी जीत में छल कहीं शामिल तो नहीं।
(2)
वो जो हाथ मिलाने से भी आज कतराते हैं।
कभी गले लग कर वो अपना गम सुनाते थे।
अल्फ़ाज़ो में जिसे वो अपना दर्द सुनाया करते थे।
अब ख़ामोश है सारे ज़ख्म दिल में छुपाया करते हैं।
अपना गांव अपने लोगों को वो छोड़ आया पीछे।
हर रात वो शख्स तकिया में मुंह छुपा कर रोता है।
कुछ अधूरे ख़त, कुछ यादें और कुछ एक तस्वीरें।
बस इतना ही सामान मिला उसके गरीब खाने से।
कितना कठिन रहा होगा, यह सफर उसके लिए,
तमाम उम्र बस तस्वीरों में उसे देखना बातें करना।
कैसे समझाए अपने मन को ?
सब रिश्ते नहीं होते उम्र भर के लिए।
कुछ प्रश्नों के उत्तर होते हैं,
अनकहे- अनसुने रहने के लिए।
कभी -कभी इंसान थक जाता है,
ख़ामोश रहते -रहते।
अपनी कही जाने वाली जिंदगी औरों,
के लिए जीते -जीते।
(4)
वो ख़फ़ा ही अच्छा लगता है,
फिर उसको मना कर क्या करना।
मेरी चाहत मुझसे ही छुपाएं बैठा है।
बड़ा नादान है तू दिल जलाएं बैठा है।
ख़ुद को खोने से बेहतर होता है वहां से,
आखिरी कोशिश करने के बाद हट जाना।
बस यहीं ज़बाब है जज़्बात खिलाड़ियों का।
तमाम उम्र वह उसी घर का दरवाज़ा खटखटाएगा।

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