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| रुठी तकदीर मनाने निकले थे |
अपनी रिश्तों की गांठें खोलने से पहले।
सीखिए पत्थर पिघलाने की कला पहले।
बैठ ना जाना कहीं थक हार कर,
तुम रुठी तक़दीर मनाने से पहले।
रूठ गए थक हार के आख़िर ख़ुद से ही,
तुम तो रूठी तक़दीर मनाने निकले थे।
अपना दिल ना रेजा- रेजा कर लेना।
किसी के टूटे दिल को बहलाने से पहले।
अपने आप को ही घायल कर बैठे वो,
महबूब के टूटे दिल को बहलाने निकले थे।
डूब गए ख़ुद मायूसी के सागर में सनम,
हम तो डूबते को पार लगाने निकले थे।
ख़ुद को ही समझाने में नाकाम दिख रहे हैं,
हम जो इस जमाने को समझाने निकले थे।
हैरान होना लाजिमी है उनका,
मरुस्थल में बाग लगाने बैठे थे।
मौत भी दुत्कार कर चली गई हम पर यारों,
हम कफ़न में गोटा और सितारे लगाने बैठे थे।

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