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| Arth pa jayege |
1)
एक अनजाना सा रिश्ता,
बना दिया यूं ही कबूतरों ने।
खत को जाना कहीं था 🥲,
कहां पहुंचा दिया कबूतरों ने।
(2)
गर्दिश में हो जब सितारे,
खत गलत पते पर पहुंच जाते हैं।
आदम कद के पास जाने से,
हमारे कद बौने नजर आते हैं।
(3)
यह गर्दिशों के दिन है एक दिन,
ऐ दिन भी गुजर ही जाएंगे।
सुनहरे पल आते ही अर्थहीन शब्द मेरे,
अर्थहीन ना रहेंगे अर्थ पा जाएंगे।
(4)
अब कहानी ने मोड़ ले ली,
अब हम तो सोने चले।
जिंदगी की किताब के,
पन्ने फाड़कर रोने चले।
(5)
काश जो मिलता फिर,
जिंदगी भर वो छीनता नहीं।
जन्म लेनेवाला मरता नहीं।
रिश्तों को तराजू पर तौलता नहीं।
(6)
जिंदगी तुझे जाना समझा,
मुझे एक बात समझ आई ।
जिंदगी में हर जगह हर क्षण,
है कुछ ना कुछ तो पंगाई ।
(7)
प्यार, मोहब्बत, रिश्तो की,
शराफत, में भी धोखा खाई है।
सवाल- जवाब की उलझन में,
मैंने आंखों की नींद गंवाई है।
(8)
कभी-कभी इंसान सच में,
थक जाता है खामोश रहते-रहते।
अपनी कही जानेवाली जिन्दगी,
औरो के लिए जीते- जीते।
थक गया हूं अब बहुत ऐ जिन्दगी
अपनों की अपनापन से
आंखों के अश्रु छुपाने से
रिश्तों की शराफत से
अंदर की खामोशी से
दर्द-ए-दिल सम्भालने से
सपने उम्मीदो के टूटने से
(9)
जो भी मिलता है कुछ दिन अच्छा लगता है।
जो अच्छा लगता है एक दिन वह छिनता है।
अब ना दूँगा कोई भी जबाब तेरे सवालो का।
अब हर जबाब होगा केवल मेरे सवालो का।
😀मेरी चाहत मुझसे ही छुपाएं बैठा है।
बड़ा नादान है तू दिल जलाए बैठा है

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