तुम झुकोगे नहीं यह बात
तुम झुकोगे नहीं यह आदत,
तुम्हारी मुझको अच्छी लगती हैं।
मैं झुकूं तो उठाकर सीने से लगाना,
तेरा मुझको अच्छा लगता है।
तुम मुझको ना समझ सकें,
यह तेरी नज़रों का कसूर है।
तेरी नासमझी से मुझे प्यार है।
मेरे प्यार को कब किसी,
प्रमाणपत्र की दरकार है।
तेरी जुस्तजू में,जो भी मिला,
हम उससे ही गुफ्तगू करते रहे।
रिश्ता मेरे लिए अहम था,
दिल में समेटकर रखते रहे।
ख़ामोशी की दीवारों से डरकर,
हम आखिर तक कोशिश करते रहे।
मेरे सवाल वगैर ज़बाब ना रह जाए,
हर बार हम नया सवाल करते रहे।
हार मानने वालों में मैं थी नहीं,
तेरी जीत के खातिर हारते रहे।
तुम भी महसूस करोगे एक दिन,
हम जो कहते रहे, तुम जो सुनते रहे।

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