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हम जो कहते रहे तुम सुनते रहे
कर्म की काव्यात्मक अभिव्यक्ति
Bukhar bistar aur ek kalakar
विदाई की बेला
मैसेज अब Unseen रह जाते है
प्रेम दर्शन का विषय है
औरतों का मौन चुप होना नहीं होता
वर्षों पहले की सूरत आंखों में बसा रखी है