अक्षत, रोली, चंदन से किया श्रृंगार भोले का, हाथ गंगाजल भावपूर्ण मन ले आई मैं द्वार। प्रेम सिद्धि का वरदान छुपा रखा था प्रभु, किया शंकर सावन के तेरे स…
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