देह तू मेरा अभिमान हो सकते, स्वाभिमान तो मेरा अंदर बैठा है। Sayed kahi chupa ho andar me मेरे सांस तुम्हारी अमानत सही, सांसों की माला उसके नाम रही।…
Read moreBhavnao ki bhi ek umar hoti अंदर तक तोड़ गई जब बेरुखी उनकी। अपने भी मुझपर सवाल उठाने लगें हैं। रस्सी गले से निकालकर हम जीने लगे हैं। जिस्म की बात …
Read moreइतने सपने देख लिए, अब तो सच भी सपना लगता है। बगल में खड़ा इंसान भी, मुझे मृगमरीचिका सा लगता है। सूरत इतनी बदल गई, आईना भी बेगाना सा लगता …
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