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तू है मेरा अस्तित्व नहीं

 


देह तू मेरा अभिमान हो सकते,

स्वाभिमान तो मेरा अंदर बैठा है।


Sayed kahi chupa ho andar me

मेरे सांस तुम्हारी अमानत सही,

सांसों की माला उसके नाम रही।


तन मेरा मधुर एहसास हो तुम।

सच कहूं तो तू मेरा अस्तित्व नहीं?


बदन तेरा मुझ पर अधिकार सही।

तुमसे मुझे भी अथाह है प्यार सही।


हे मेरे प्यारे अद्भुत अनमोल काया।

तू है मेरा भाग्य मेरा सौभाग्य नहीं।


पर सच है ना तो मैं तेरा पुजारी हूं ,

ना प्रेमी हूं, ना ही मैं तेरा प्यार सखा।


तो फिर मैं किसकी पूजारन हूं ?

वह कौन है मेरा अराध्य सखा ?


मैं ढ़ूढ रहा अपने प्रियतम को,

हर नगर- नगर हर डगर- डगर।


सुन रखा है, वह है कण- कण में,

शायद कहीं वो छुपा हो मेरे अंदर।

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