अकेलापन वह नहीं जब घर में कोई ना हो।
अकेलापन वह नहीं जब घर में कोई ना हो,
अकेला होने का एहसास तब होता है।
जब किसी को आपकी जरुरत ही ना हो।
आईना से पूछना पड़े सांस ले रही हूं --
क्या मैं जिंदा हूं या मर चुकी हूं ?
पता ही ना कब और कैसे मरी ?
जिंदगी में कोई कमी ना हो ---
फिर भी आंसू खुद पोंछने हो,
आंसू अकेलापन अकेला होने के नहीं,
बहुतों के बीच अकेला होने का हो।
अंदर कोई है जो कब से इंतजार कर रहा है,
दूसरों में खुशी ना तलाशे अंदर झांककर देखें।
बहुत प्यार कर लिया आपने इस जमाने से,
बस एक बार खुद को गले लगाकर तो देखें।
हालात को मौके की तरह लिया जाए।
रिश्ते के उतार चढ़ाव को दर्शक बन देखा जाए।
दूसरों को बदलने की कोशिश बेकार है।
अपने आप में ही बदलाव लाया जाए।

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