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हसरतों से कह दो

 



फूलों के संरक्षक होते हैं कांटे 

प्रेम कर सुकून की चाहत रखना यूं है---

ज़हर पीकर जिंदगी की चाहत रखना।


अब ऐसे रोकर- रोकर बेहाल हो रहा है।

जैसे उसका खुद का इंतकाल हो रहा है।


कांटों से दुश्मनी नहीं करते सच्चे बाग़बान।

फूलों के संरक्षक बन आते हैं कांटे जनाब।


दिल को लगा सकें बन कांटे उजड़े दयार में,

करते हैं शूल इंतजार फूलों का फिर बहार में।


अपने हसरतों को कह दो मुस्कराना ना छोड़े।

खिजां जाने बाद बहारें कभी आना ना छोड़े।


बुलबुल को गिला कभी ना रहा खिंजा या बहार से।

जीयो इस क़दर जीयो, मौत को मलाल हो ले जाने में।


मेरी हसरतों से कह दो बहारें आएगी एक दिन।

इंतज़ार करें इंतजार और बस इंतजार दिल करे।

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