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| Happy Women's day ❤️ |
नारी हो यह मत भूलो तुम,
घुट-घुट कर जीना छोड़ो,
जागो तुम अपनी शक्ति पहचानो तुम।
बंधन जब कसने लग जाए,
साँस लेना दुश्वार जब हो जाए,
ठहरकर सोचना उस क्षण तुम,
जब किसी के जीवन में तेरा रहना,
ठहरना विकल्प सा हो जाए।
पलट जाना आत्मसम्मान को बचाना तुम।
संस्कारों की दुहाई दे-देकर,
चुप कराए कोई तुझे अगर,
तुम्हारी आवाज़ लौटे भीतर,
संस्कार भूल जाना उस घड़ी,
पलट जाना आत्मसम्मान को बचाना तुम।
अपनी आवाज़ का साथ देना,
ललकारना,आंखें दिखाना तुम,
अबला नारी समझ ना डरना तुम।
प्रश्न उठाना सीखो चुप्पी को आवाज दो,
भस्म कर देना जहां विकल्प हो अंतिम,
दहकता अंगार बनने में ना हिचकना तुम।
समय के संग बदलना उचित है जानो,
निःसंकोच बदलना अधिकार है तेरा।
संस्कार, नैतिकता, कर्तव्य सब एकतरफ,
सबसे पहले आत्म सम्मान है तेरा।
पलट जाना आत्मसम्मान को बचाना तुम।
हर हाल में जीने की कसम ना लेना,
समझौते की शर्तों पर ना जीना।
अपनी शर्तों पर जीना है जीवन,
नृप हो या रंक, जीना रानी की तरह।
समाज, परम्परा, परिवार या संस्कार,
जरूरी हैं, पर जीवन से ऊपर तो नहीं।
नियमों की बेड़ियां गुलामी की निशानी,
तेरा जीवन तेरा है, इनकी बपौती नहीं।
नियमों के रचयिता होते हैं वही---
जिन्हें गर्भ में स्थान देकर तुम संसार में लाती हो।
आदर्शवादिता का नियम बस तेरे लिए बनाते हैं।
सारे बंधन तोड़ देना---
किसी सत्ता के अधीन होने से
गरिमापूर्ण इंकार तुम कर देना।
पृथ्वी पर पल रहे सभी जीवों में,
श्रेष्ठतम हो अपना ख्रयाल रखना तुम।
पलट जाना आत्मसम्मान को बचाना तुम।
घबराओ नहीं तर्क करती स्त्रियों के सवालों से,
आनेवाली पीढ़ियों के लिए रास्ता बनाती है।
तर्क और सवाल ही इतिहास नया बनाते हैं।
नर बिन नारी अधूरी तो नारी बिन नर भी अधूरे है।
यह बात किसी ने कही,यह बात सभी ने मानी है।

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