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Stri hone ka dard

 



मैं एक स्त्री हूं ---

मैंने माँगा था सिर्फ एक प्यार भरा स्पर्श, 

मुझे मिला— सन्नाटा, दूरी,अंतहीन घाव।


मेरे दिल ने तुम्हें अपना समझा , 

तुमने मुझे पराया बना दिया।  

हर बार जब मैंने तुम्हें पुकारा,  

मेरी आवाज़ को कुचल दिया।


तुम्हारी बेरुख़ी ने मेरी आत्मा को चीर दिया,  

तुम्हारी चुप्पी ने मेरे विश्वास को मार दिया।  

तुम्हारी नज़रें कभी मेरी पीड़ा से नहीं भीगीं,  

तुम्हारे शब्द कभी मेरी सच्चाई से नहीं जुड़े।


अगर कभी रास्ता में टकरा जाए,  

तो बस चुपचाप निकल जाना है।  

अब ना कोई सवाल,ना कोई जबाब, 

बस तेरी दुनिया से दूर चला जाना है।

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