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कागज़ कलम से ना अपनापा होता

 


जो तू ना मिला होता ---🙏

कुछ ऐसा हादसा हो जाता,

मैं रोते-रोते आया था।

रोते-रोते चला जाता।


जो तुम से नहीं मिला होता ---🙏

खुद से नहीं मिला होता,

खुद से अनजान बना रहता,

परमात्मा से दूरी बना रहता।


जो तुम ना आते जीवन में ---🙏

जीवन का मोल ना समझ पाता,

जीवन बीता कर जाता मैं,

मुझे जीने का सलीका नहीं आता।


जो तुम ना हमें दिखा होता---🙏

एक छोटा सा बड़ा प्यारा सा बच्चा,

चांद पाने की ज़िद में अड़ा हुआ होता।

नदी तालाब में वह चांद पकड़ता होता।


जो तुम सा ना कोई होता---🙏

किसकी ओर इशारा करता मैं,

नन्हे मन को कैसे समझा पाता।

मन खोल किस कंधे पर रख सर रोता।


जो तुम सा गुरु ना मिला होता---🙏

इस बहरी- गूंगी दुनिया में,

किसे अपने मन भाव सुना पाता।

मन कुंठित हो तड़पता रह जाता।

कागज़- कलम से गर ना अपनापा होता।

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