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बचपन का दोस्त V/S स्मार्ट दोस्त

 


आपके Best Friend (आप खुद है)
बचपन का दोस्त V/S स्मार्ट दोस्त

बचपन का दोस्त 😀

कविता आपके Best Friend (जो आप खुद है)


सही पर साथ तो देंगे हजारों।

ग़लत पर साथ देनेवाला दोस्त चाहिए।


गुड़िया तुम्हारी है, तुम ही ले लो,

कह अपनी गुड़िया, देनेवाला दोस्त चाहिए।


रूठे भी मुझसे, फिर मान भी जाए।

मुझसे मेरी ही शिकायत, करने वाला दोस्त चाहिए।


थकावट सारी जिससे, मिलकर दूर हो जाए,

फिर वही बचपन का, भोला-भाला दोस्त चाहिए।


समझदार दोस्त 🤔


भूल कर भी ना जाए, कभी दुश्मन के खेमे में।

बहुत से दोस्त पुराने, आपके आदाब बजाएंगे।


जो थे कभी आपके अपने - दोस्तों के दायरे में।

वो खामियां आपकी, आपको गिनाते नज़र आएगे।


समय का दौर है ऐसा, आपको तोड़ कर रख देगा।

जी चाहे रोए या गाऐ, आप बस अपने ही कमरे ‌‌‌में।


वक्त ऐसा भी आएगा, सोचा भी ना  होगा।

जो रोटी मांगते थे,आज वो माखन उड़ाएंगे।


वक्त वक्त की बात है, आप दिल पर पत्थर तो रख लें।

उड़ने वाले भी कभी न कभी, जमीं पर भी तो आएगे।


जो तेरा न हो सका, वो भला उनका क्या होगा ?

दोस्त थे या दुश्मन, समझ जाएंगे बस चंद घंटों में ।


दुर्भाग्य तेरा था इसमें, उनकी खता क्या थी।

इस दौर में इंसानियत की ख्वाहिश रखते हो।


जाने कहां गया और कौन लूट गया मेरा बचपन।

यह कौन-सा दलदल में ढकेल गया मुझे बचपन।


सब खिलौने वैसे ही पड़े हैं, मैं बड़ा क्यो हो गया?

गोलू- मोलू, चुनू- मुन्नू  छोटू भी बड़ा अब हो गया।


अब भी मिलते हैं दोस्त, पर अब नहीं वो बात है।

दोस्ती रहित दोस्तों की टोली, अब भी मेरे साथ है।


निष्कर्ष --

रिश्तों में सबसे अनमोल, दोस्ती का रिश्ता प्रधान है।

ख़ून का बंधन ना बस मन के भावना का एहसास है।

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