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स्त्री को समर्पित

 


स्त्री केवल देह नहीं उर्जा है।

तुम्हारे भाव तुम्हारी दृष्टि ही है,

जो मातृत्व का आभास दिलाती है।

सीमित से समभाव समग्र हो जाती है।


चंचलता छोड़---

शांत,निर्मल व दिव्य शक्ति हो जाती है।

पुत्रभाव जागृत हो मातृत्व रुप लेता है।

आकर्षक विषय वासना लुप्त हो जाती है।

चेतना उसे खुद की पहचान करवाती है।


क्योंकि ---

स्त्री केवल एक देह नहीं शक्ति है।

स्थूल दृष्टि से मात्र देहरुप दिखेंगी।

निर्मल नज़र तुमको जो दिखाएगी,

वहीं तो स्त्री का सनातन शक्ति रुप है।


स्त्री स्वभाव ---

वह सबके लिए माता स्वरूप होकर भी,

स्वयं से कभी विमुख नहीं होती,

अपने विचार,भावना में समाहित रहती है।

वहीं शक्ति शिव संग जगत तरंगिणी है।


स्त्री मायावी ---

स्त्री में चंचलता,आकर्षक,शक्ति,

भावनात्मक संसार की दृष्टि से,

छली, प्रपंची,अस्पृश्य मायावी,

नासमझ समझना नासमझी है।

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