Ticker

6/recent/ticker-posts

Header Ads Widget

Umar ke iss parav par

 



याद है वो वाक्या, जैसे कल की बात हो, 

मैं कुछ और कहूं तू कुछ और समझता था।


वर्षों बाद दिखा अनजाना सा था।

मुझे देखकर मुस्कराया था जरुर,

उसकी मुस्कान में थकावट सी थी।


आंखों में वहीं पहले सी चमक थी,

किसी कोने में कुछ ऐसा था जिसे,

छिपाने की नाकाम कोशिश सी थी।


उसके ओठ बहुत कुछ कहना चाह रहे थे,

वर्षों की चुप्पी ने उसपर कब्जा कर रखा था।

उसके पास भाव थे व्यक्त करनेवाले शब्द ना था।


मैंने बस इतना ही तो कहा था उससे ,

चलो छत पर खुले आकाश में चलते हैं,

तुम मौन ही रहना, हम ही कुछ कहते है।


उम्र के इस मोड़ पर खिलखिला कर हंसते हैं,

पुरानी यादों के दरख्त से धूल झाड़ते है।

फूलों की खुशबू से फिर प्यार करते हैं।


कई बारिश हमने वगैर भींगें गुजारे हैं,

आज भींगते हुए उसका हिसाब करते हैं।

जब तक जिंदा है क्यों मौत की बात करते हैं।

khilkhikar hasate hai 

Post a Comment

0 Comments