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Bas itna hi

 


Kuchh kho gaya lagta hai 


पौधों की जीवनी, मानव जीवन का दर्शन---

कभी माली ने जिस पौधे को

अपने हाथों से मिट्टी में दबाकर,

धीरे-धीरे सुलाया था,

पानी की बूंदों से जीवन दिया था—

वही पौधे आज अपनी छोटी-से गमले में,

थोड़ी-सी मिट्टी और थोड़े-से खाद में,

सांसें खींचते- खींचते थक गए हैं।

पानी की कमी से उनकी जड़ें सूख गईं,

जीवन की डोर टूट गई।

अब चाहे माली कितना भी चाहे,

उनको फिर से जिंदा नहीं कर पा रहा।

कुछ पौधे तो पानी की अधिकता से भी मर गए।

क्योंकि हर पौधे को बराबर मात्रा नहीं चाहिए होती—

एक जैसी मिट्टी, 

एक जैसा खाद,

और एक जैसा पानी,

सबके लिए जीवन का सूत्र एक सा नहीं होता।

बारिश में डूबे रहने से,

कुछ पौधों की जड़ें गल गईं,

और वे भी समाप्त हो गए।

हर पौधे की अपनी ज़रूरत है,

अपनी पसंद है,

पौधे का जीवन-संगीत ---यह कथा हमें सिखाती है कि जीवन की देखभाल केवल प्रेम से नहीं, बल्कि समझ से भी होती है।

हर पौधा, हर इंसान, अपनी अलग ज़रूरतें लेकर आता है।

कभी इंसान हो या पौधे, कमी से टूटता है, कभी अधिकता से गल जाता है।

संतुलन ही जीवन का असली जल है, जीवन का आधार है,

और समझ ही उसका असली खाद।


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