Ticker

6/recent/ticker-posts

Header Ads Widget

Tum khud hi pata bata do

 


Tum khud hi apna pata bata do 

कैसे हो ? कहां हो ? मुझको अपना पता बता दो 


मन की गलियों में छुपे हो।  

पता तुम्हारा पूछूं मैं किससे ? 

तुम तो मेरे सपनों में रुके हो।  

तेरी यादें में खोई,

चाँदनी रातों में मैं तुमको ढ़ूढू ,  

हवा के झोंकों में महसूस करुं।


तस्वीर में भी आधा दिखते हो।

पूरे दिखते तो पढ़ लेती मैं,

तेरे नयनों की मैं भाषा।

तुम्हें ढूँढने चली थी मैं,  

पर तुम तो मेरे दिल में बसते हो।  


जिस-जिस से पूछा ग़लत बताया।

अब तुम खुद ही अपना पता बता दो।


पता बताओ तो मैं मिलने आऊं।

सितारों को मैं रोशनी दिखलाऊं।

मुहब्बत का पैगाम तुम तक पहुंचाऊं।

दिल की धड़कन तेरा घर है समझाऊं।  


हवा के झोंके जब छूते हैं मुझको,  

लगता है तुमने पुकारा है मुझको।  

तू ऐसे मेरी रूह में बसा है,

जीवन तेरा रहस्य नया है।


कैसे हो ? कहां हो तुम ?

ये सवाल मेरे जीवन का रहस्य है।

हर राह है जानी-पहचानी,

हर रास्ते पर तलाश है जारी।

तुम तक पहुंचना है खुद तलाश का हिस्सा।


इंसान चलता है, ढूँढता है, थकता है,

मंज़िल से ज़्यादा जिंदगी सफ़र में जीता है।  

तू तो चुपचाप समय की धारा में बहता है।  

कभी विचारों में, कभी अनुभूतियों में,  

कभी शून्य में और कभी अनंत में।  


कैसे हो, कहां हो, यह प्रश्न नहीं,

लगता है ये प्रश्न ही जीवन का दर्शन है।

Post a Comment

0 Comments