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| Keya khoya keya paya |
रिक्त जगह को रिक्त ही रहने दो।
उसे भरने की कोशिश मत करो।
यह खालीपन मेरी यादें दिलाएगी।
गाहे-बगाहे तुम्हें मेरी याद तो आएगी।
तुम पर आकर रुक गया मैं,मेरा कसूर है।
क्या खोया, क्या पाया यह मेरा नसीब है।
तु मेरा तबलगार नहीं तो कोई बात नहीं।
मुझे भी तो अब किसी की दरकार नहीं।
महफ़िल में दर्द छुपाता हूं,रात में रोने तो दो।
मेरी यादों को खुले आकाश में उड़ने तो दो।

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