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| लाशें जलाई जाती,गलाई नहीं जाती |
तुम्हें यूं बेवक्त बर्बाद ही होना था ऐ दिल,
कोई मिला नहीं ऐसा बर्बाद-ऐ-इश्क में,
तेरे आंखों के आंसू को पीने वाला।
जल कर भस्म होती तेरे आशियाने में,
जो भी मिला आग में हाथ सेंकने वाला।
कितनी सफाई से आशियाना जलाई तूने।
एक भी चिंगारी तेरे घर तक नहीं पहुंची।
जब भी करना अपनी जीत के किस्से।
मेरे हारने का भी उसमें ज़िक्र करना।
जिस भी कहानी में तेरा किरदार होगा।
मेरे गुनाहों का चर्चा वहां सरेआम होगा।
जब भी करना अपनी जीत के किस्से।
मेरे हौसले का भी उसमें ज़िक्र करना।
जब-जब मजबूत कंधे की चर्चा तेरी होगी।
मेरी थकान भी उसमें कहीं शामिल होगी।
मैं जो कहती थी तुमसे सब ठीक- ठाक है।
उस झूठ को अब ना तुम कभी सच कहना।
जब भी लिखी जाएगी तेरी खामोशी के किस्से।
मेरा स्वाभिमान भी उसमें सबको नज़र आएंगा।
तकिया क्या देगा गवाही, उनके सिसकियों का।
रूई सोख लिया करती है,बेबसी के आंसूओं को।
समंदर संभालने वाला एक कतरा से डर गया।
वह क्या साथ निभाएगा जो साया से डर गया।
ज़ख्म नहीं है यह लाश है, नमक छिड़कनेवालो,
लाशें जलाई जाती है,नमक से गलाई नहीं जाती

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