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| कल रात मैंने एक सपना देखा |
(1)
सपने में कोई अपना देखा।
सोते - सोते हंसते देखा ,
हंसते- हंसते रोते देखा।
कल रात मैंने एक सपना देखा।
पेड़ पर उगता पैसा देखा,
पैसा भी कुछ ऐसा देखा।
पेड़ काटने वालों को आपस में,
पैसों के लिए मैंने लड़ते देखा।
(2)
कल रात मैंने एक सपना देखा।
नन्हे- नन्हे मासूम हाथों में,
पुस्तक की जगह जंग-जखीरा देखा।
रोता सिसकता भारत देखा।
कल रात मैंने एक सपना देखा।
हट्टे- कट्टे नौजवानो को कल,
बोतल से जाम पे जाम भरते देखा।
(3)
कल रात मैंने एक सपना देखा।
महलों में रहने वाले भलमानुष को ,
तिलचट्टों सा नाले से निकलता देखा।
कल रात मैंने एक सपना देखा।
अपनी -अपनी विद्वत्ता दिखाने हेतु,
गुरुओं को आपस में लड़ते देखा।
(4)
कल रात मैंने एक सपना देखा।
घर में नई बहु लाने के डर से,
कचहरी जेल जाने के डर से,
शादी के नाम से तौबा करते देखा।
कल रात मैंने एक सपना देखा।
कलयुग का प्रथम चरण में मैंने,
बेटी की ही नहीं, बेटों के शादी में,
घर ज़मीन सब बिकते देखा।
बेटे- बेटियों के माता- पिता को,
अपना घर- परिवार बसाना छोड़,
रिलेशनशिप को उचित ठहराता देखा।
(5)
कल रात मैंने एक सपना देखा।
कलयुग का यह प्रथम चरण है ,
पूरी फिल्म अभी भी बाकी है।
अच्छे दिन की आश में पता नहीं,
कल कितने सपने आने बाकी है।
कल रात मैंने एक सपना देखा।
सास- ससुर बन, बेटा को खोने के डर से,
हर घर में सलमान राहुल सा कुवांरा देखा।
(6)
कल रात मैंने एक सपना देखा।
मधुसूदन को फिर से धरती पर आते देखा।
हिन्दुस्तान को सोने की चिड़िया बनाते देखा।
धर्म-कर्म, सत्य-असत्य का पुनः पाठ पढ़ाते देखा।
कल रात सुनहरा एक सपना देखा।
द्रौपदी, अर्जुन का सच्चा साथी देखा।
कर्ण की मजबूरी समझते कान्हा को देखा।
कल रात मैंने एक सपना देखा।
सपने में मैंने एक अपना देखा।

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