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| परेशान देखकर |
दिल रो पड़ा उनको पशेमान देखकर।
मुंह फेर लेते हैं जो हमें परेशान देखकर।
जाहिर ना हो उनसे मेरा कोई वास्ता भी है।
चल दिए तेरी महफ़िल से हम मुंह मोड़कर।
गुरुर बहुत है, हमें भी अपने आप पर।
दावा करते नहीं है केवल खानदान पर।
रुप-ऱग,जाति,धर्म और खानदान परखना हो,
सर्वप्रथम इंसान में इंसानियत को देखते है।
जुबा पर मेरे कहीं कोई अपशब्द ना आए,
लफ़्ज़ों को निकालते हैं संस्कारों में डूबोकर।
रहने को तो रहते है हम बहुत सलीके से ।
पैसा नहीं गुरुर रखते हैं तिजोरी में भरकर।
जन्मदिन पर देखो हमें उपहार क्या मिला।
जन्मदिन मुबारक रह गया यादगार बनकर।

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