एक था बचपन प्यारा सा बचपन। चाहत चांद को पाने की थी। हर मौसम सुहाना सा था। मां की कहानी में परियों का भरा हुआ खजाना था। रोने का वज़ह ना कोई हंसने का…
Read moreछोड़ बांसुरी अब कान्हा सुदर्शन चक्र उठाने होंगे। फिर से कन्हैया तुमको अब धरती पर आने होंगे। मुंह पर चिकनी चुपड़ी बातें। पीठ पर घाव खंजर से करते। घर-घ…
Read moreBhartvashi kahlane ka hame adhikar mile हरी भरी सी है यह धरती नीला- नीला अपना अंबर । गगन चुमती पर्वत की शिखर सबसे सुंदर अपना भारत । मंदिर में बजे ढ…
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