ज़ख्मी परिंदे को उड़ने दो
मन मारते- मारते जो लाश बने बैठे हैं,
कफ़न की चाहत में उदास बने बैठे हैं।
कफ़न को रंगरेज तू चुनरी का रंग दे दो,
कब से वो इंतजार में डोली सजाए बैठे हैं।
घायल परिंदा को उड़ने की वजह दे दो,
ज़ख्मी हालात में भी उड़ने की हुनर दे दो।
मेरे अपनों को अब तो मेरी खबर दे दो।
कफ़न को रंगरेज़ तू चुनरी का रंग दे दो।
जो ना हो सकेंगे शरीक मेरे जनाजे में यारो।
उनको भी एक मुट्ठी मिट्टी की इजाजत दे दो।
जन्नत की ख्वाहिश रखते हैं उन्हें जन्नत दे दो।
खुदा हमें कम से कम जहन्नुम में जगह दे दो।

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