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मेरी जिंदगी तो यारो खुली किताब सा था
जाते-जाते लौट कमीना आकर आतंक मचाए, आओ प्रण लें हम सब एक एक पेड़ लगाए, अपने जरुरत का आक्सीजन हम अपने पौधे से पाएं
रतजगो की थकान में पाओगे बेकरारी के निशान
गर्मी में खिलने वाले परमानेंट फूलों की लिस्ट
आंख खुलते दिल ने तुम्हें पुकारा
जैसमीन / मोगरा में फूल नहीं आ रहे /  कारण और निवारण
लगाया नहीं एक भी पेड़ तुमने
मैं वहीं हूं जो पहले था जमाने ने अपने ख्यालात बदल डाले
जिंदगी तू मुठ्ठी भरी रेत सी फिसलती रही
झाड़ू कब खरीदे कहां रखें अब फेंके