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औरतों का मौन चुप होना नहीं होता
प्रियतमा के लिए रंग चुराओ
मैं तुम्हें छोड़कर नहीं जाऊंगी
नमक का कर्ज मुझ पर बाकी है
कोई पूछे सब खैरियत तो है?
एक तुम ही नहीं हो महफ़िल में
दिल चटखने की ध्वनि तुम तक ना पहुंचे
मेरी शायरी में नाम तक लिया नहीं
बंदर होकर ना नारियल मांगना
जाने वाले जनाजे आने वाला वक्त